vishal bhardwaj लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
vishal bhardwaj लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

18 दिसंबर, 2010

जग जा री गुड़िया... : विशाल भारद्वाज


विशाल भारद्वाज के भीतर दो तरह के विशाल भारद्वाज हैं. कमीने के गुड्डू और चार्ली की तरह, लेकिन दोनों हकलाते या तुतलाते नहीं हैं. एक के पास अपार दुख, विश्वासघात और क्रोध की कहानियां हैं और दूसरे के पास बच्चों की कहानियां.

पूरा पढ़ें >>